➤ मंडी में 152 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स का शिलान्यास
➤ 9.6 हेक्टेयर भूमि पर बनेगा आधुनिक परिसर, चार ब्लॉकों में मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
मंडी में न्यायिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने रविवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में 152 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स का शिलान्यास किया।
यह अत्याधुनिक कोर्ट कॉम्प्लेक्स 9.6 हेक्टेयर भूमि पर विकसित किया जाएगा। परिसर में चार अलग-अलग ब्लॉक बनाए जाएंगे, जहां जजों, वकीलों और आम लोगों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे मंडी सहित आसपास के क्षेत्रों में न्यायिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम के बाद आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायिक परिसरों को अस्पतालों की तरह काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार लोग उम्मीद और विश्वास के साथ अस्पताल जाते हैं, उसी तरह न्यायालय में भी लोग राहत और न्याय की उम्मीद लेकर आते हैं। इसलिए न्यायपालिका को भी सेवाभाव और संवेदनशीलता के साथ कार्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मंडी को छोटी काशी के नाम से जाना जाता है और श्रद्धा से लोग यहां आते हैं। अब इसी स्थान पर न्याय का मंदिर भी स्थापित होने जा रहा है, जो भविष्य में लोगों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि समाज में अक्सर मौलिक अधिकारों की बात की जाती है, लेकिन मौलिक कर्तव्य भी संविधान का उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी पालना करना भी जरूरी है। उन्होंने लोगों में संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मुख्य न्यायाधीश का प्रदेश आगमन पर स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य हर नागरिक तक न्याय और अधिकारों की पहुंच सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार समावेशी विकास, सामाजिक न्याय और पारदर्शी प्रशासन के माध्यम से लोकतंत्र को और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने लगभग 6000 अनाथ बच्चों को “चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट” के रूप में अपनाया है और इसके लिए देश का पहला कानून बनाया गया है। साथ ही बेटियों को समान अधिकार देने के लिए पैतृक संपत्ति में बराबरी का अधिकार और विवाह की आयु 21 वर्ष करने जैसे कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के माध्यम से विधवा महिलाओं के बच्चों की शिक्षा का खर्च सरकार उठा रही है। इसके अलावा राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से लगभग साढ़े पांच लाख लंबित मामलों का निपटारा किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि देश के आदर्शों और मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र समानता, न्याय और स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर आधारित है।
कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया सहित अन्य न्यायाधीशों ने भी न्याय तक आसान पहुंच और संवैधानिक कर्तव्यों के महत्व पर अपने विचार रखे।



